गीत
मृत्यु के आकुल क्षणों में, प्यार का प्रतिदान देना।
मृत्यु के बादल घुमड़ कर, घेर लें असहाय तन को,
चेतना का विकट झंझा, घेर ले जब विकल मन को,
विगत स्मृतियाँ समेटे, तब कहीं से पास आकर,
विहँस कर अन्तिम विदा का -
तब प्रिये वरदान देना ।
प्यार का प्रतिदान देना।।
शब्द अधरों पर धरे से, कण्ठगत हों प्राण मेरे,
हिचकियों में चाह रोती, जब किसी को हाय टेरे,
नत नयन हो,कुछ झिझक कर,फिर सँभल कर क्षुब्धमन से,
चिर दलित निज प्यार को तुम -
प्यार का बलिदान देना।
प्यार का प्रतिदान देना।।
रूप की शैशव छटा जब, हूक बन-बन कर कुरेदे,
फिर कभी विरही विगत की याद जब आ, हृदय बेधे,
वंचना के ज्वार से छुट, स्वर्ण क्षण आये, उन्हें भी,
स्वत्व जीवन का समझकर-
प्यार पर अधिमान देना।
प्यार का प्रतिदान देना।।
सुन्दर गीत।
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