गीत
प्यार में हम तुम्हारे तड़पते रहे,
तुम कहीं और नजरें मिलाती रहीं।
रूप सौन्दर्य की वन्दना में सदा,
पा दिलासा तेरा,सर झुकाते रहे।
तुम न रूठो कभी नित नये चाव से,
हो मुखर प्यार के गीत गाते रहे।
स्वर हमारे सुने अनसुने कर दिये,
तुम किसी का प्रणय गीत गाती रहीं।
प्यार में हम तुम्हारे तड़पते रहे।
हर समय हम तुम्हारे दिवाने बने,
प्यार में रात दिन आह भरते रहे।
फूल से तन पे कोई भ्रमर लालची,
दृष्टि दे ना गड़ा, ध्यान धरते रहे।
किन्तु उर में हमारे न झांकी कभी,
दृग किसी और के मग विछातीं रहीं।
प्यार में हम तुम्हारे तड़पते रहे।
बन कसक प्यार की हूक उठती रही,
उर सदा प्यार को ही मचलता रहा।
बेवफाई बनी तीर गड़ती रही,
प्यार तेरे विरह बीच जलता रहा।
वह सिसकता हुआ तोड़ता-दम रहा -
तुम नशेमन किसी का सजातीं रहीं।
प्यार में हम तुम्हारे तड़पते रहे।
तुम कहीं और नजरें मिलाती रहीं।
रूप सौन्दर्य की वन्दना में सदा,
पा दिलासा तेरा,सर झुकाते रहे।
तुम न रूठो कभी नित नये चाव से,
हो मुखर प्यार के गीत गाते रहे।
स्वर हमारे सुने अनसुने कर दिये,
तुम किसी का प्रणय गीत गाती रहीं।
प्यार में हम तुम्हारे तड़पते रहे।
हर समय हम तुम्हारे दिवाने बने,
प्यार में रात दिन आह भरते रहे।
फूल से तन पे कोई भ्रमर लालची,
दृष्टि दे ना गड़ा, ध्यान धरते रहे।
किन्तु उर में हमारे न झांकी कभी,
दृग किसी और के मग विछातीं रहीं।
प्यार में हम तुम्हारे तड़पते रहे।
बन कसक प्यार की हूक उठती रही,
उर सदा प्यार को ही मचलता रहा।
बेवफाई बनी तीर गड़ती रही,
प्यार तेरे विरह बीच जलता रहा।
वह सिसकता हुआ तोड़ता-दम रहा -
तुम नशेमन किसी का सजातीं रहीं।
प्यार में हम तुम्हारे तड़पते रहे।
"तुम न रूठो कभी नित नये चाव से,
ReplyDeleteहो मुखर प्यार के गीत गाते रहे।"
वाह-वाह! क्या बात है।