गीत
हम न होंगे एक दिन संसार होगा।
अश्रु पलकों में छुपाये,
याद कर पिछली कहानी।
हूक अन्तर में उठेगी,
देख कर कोई निशानी।
उर भरे अवसाद में, मेरा सिसकता प्यार होगा। हम 0
तरु लताएँ झूमकर, जब,
मोद उर-उर में भरेंगी।
मंद मलयानिल लहक कर,
जब हृदय शीतल करेगी।
पी कहाँ, स्वर के सुनें, उर-बीच हाहाकार होगा। हम 0
जब कहीं कोई करेगा,
भूलकर गुणगान मेरा।
या कभी तुमको दिखेगा,
था जहाँ मेरा बसेरा।
हूक जब उर में उठेगी, शेष क्या उपचार होगा। हम 0
सबल संबल बन जिन्हें,
देते रहे अविरल सहारा।
आज यद्यपि मिल चुका है,
विपद सरिता का किनारा।
याद आयेगी उन्हें, जब, सामने मँझधार होगा। हम 0
अज्ञता वश आज जिनको,
मूल्य लगता शून्य मेरा।
समय आते सब उन्हें,
समझा चुकेगा जग चितेरा।
सिर धुनेंगेे कर मलेंगे, मात्र यह प्रतिकार होगा। हम 0
सुन्दर गीत!
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