Monday, 18 November 2013

गीत - हम न होंगे एक दिन संसार होगा

गीत 

हम न होंगे एक दिन संसार होगा। 
अश्रु पलकों  में छुपाये, 
याद कर पिछली कहानी। 
हूक अन्तर में उठेगी, 
देख कर कोई निशानी। 
उर भरे अवसाद में, मेरा सिसकता प्यार होगा। हम 0
तरु लताएँ झूमकर, जब,
मोद उर-उर में भरेंगी। 
मंद मलयानिल लहक कर, 
जब हृदय शीतल करेगी।
पी कहाँ, स्वर के सुनें, उर-बीच हाहाकार होगा। हम 0
जब कहीं कोई करेगा, 
भूलकर गुणगान मेरा।
या कभी तुमको दिखेगा, 
था जहाँ मेरा बसेरा। 
हूक जब उर में उठेगी, शेष क्या उपचार होगा। हम 0
सबल संबल बन जिन्हें, 
देते रहे अविरल सहारा। 
आज यद्यपि मिल चुका है,
विपद सरिता का किनारा। 
याद आयेगी उन्हें, जब, सामने मँझधार होगा। हम 0
अज्ञता वश आज जिनको,
मूल्य लगता शून्य मेरा। 
समय आते सब उन्हें, 
समझा चुकेगा जग चितेरा। 
सिर धुनेंगेे कर मलेंगे, मात्र यह प्रतिकार होगा। हम 0

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