Thursday, 31 October 2013

गीत - घट रीत रहा है

गीत


                              जीवन का घट रीत रहा है।
जीवन का पथ धीरे-धीरे चलते-चलते बीत रहा है।
आते कुछ, अतीत के सपने, 
आते याद, पराये अपने।
उसकी स्मृतियां आ घिरतीं-
                            जो अतीत का मीत रहा है। 
                            जीवन का घट रीत रहा है।। 

अर्ध  निमीलित नयन झुके से,
स्वर अधरों पर, मौन रुके से

जाने अनजाने ही वह क्षण -
                             जीवन का संगीत रहा है। 
                             जीवन का घट रीत रहा है।।
कभी भरे भावुक तन मन से,
अधरों पर अगणित चुम्बन से,

जो अंकित हो गया वही तो-
                              जीवन का मधुगीत रहा है।
                              जीवन का घट रीत रहा है।। 

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