लोकगीत - ( मइया की पुकार)
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि!
लेइ बलैया लाल हमारे, आवहु द्वार सवांरे,
उरझी नाव देश कै, फिरिकै लावहु खींचि किनारे,
लखिकै पूतन कै करतूतै रोवै आंसू ढारि ढारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि।
तुम्हरे रकतन सिंचो बगीचो, तोरहिं अउरु उजारैं,
खुदगरजी कै अगिनि लगाइनि, हँसि हँसि हाय पजारैं,
आपन घर मां आगि लगावँइ आपै ढारैं वारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि।
सिंदूरन कै लाज बचौते, भुख मरुअन कै रोटी ,
दलितन लाइ गरे मां लेते, नंगन देत लँगोटी,
सो छीना झपटी पर उतरे हमरी कोखि बिसारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि।
दूध लजाइनि हमरो सिगरो, राजघाट कौ तारिनि,
भोरी जनता का बहकाइनि, बहुरुपिया पन धारिनि,
सारी दुनिया ते उठाइनि हो दियानत हमारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि।
मैना होती झलकारिन या होती लक्ष्मी रानी,
वीर शिवा, सुखदेव सरीखे, जो होते बलिदानी,
काहेक नया डगमग डोलति काहेक कुगति हमारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि ।
होउ जहां अम्बर तै फाटउ, यह विपदा निरवारौ,
सिंची खून की बाग न उजरै, यहिका दौरि बचावौ,
अबहूं समय देश कै धरती, आवहु लेहु उबारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि।
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भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि!
लेइ बलैया लाल हमारे, आवहु द्वार सवांरे,
उरझी नाव देश कै, फिरिकै लावहु खींचि किनारे,
लखिकै पूतन कै करतूतै रोवै आंसू ढारि ढारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि।
तुम्हरे रकतन सिंचो बगीचो, तोरहिं अउरु उजारैं,
खुदगरजी कै अगिनि लगाइनि, हँसि हँसि हाय पजारैं,
आपन घर मां आगि लगावँइ आपै ढारैं वारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि।
सिंदूरन कै लाज बचौते, भुख मरुअन कै रोटी ,
दलितन लाइ गरे मां लेते, नंगन देत लँगोटी,
सो छीना झपटी पर उतरे हमरी कोखि बिसारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि।
दूध लजाइनि हमरो सिगरो, राजघाट कौ तारिनि,
भोरी जनता का बहकाइनि, बहुरुपिया पन धारिनि,
सारी दुनिया ते उठाइनि हो दियानत हमारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि।
मैना होती झलकारिन या होती लक्ष्मी रानी,
वीर शिवा, सुखदेव सरीखे, जो होते बलिदानी,
काहेक नया डगमग डोलति काहेक कुगति हमारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि ।
होउ जहां अम्बर तै फाटउ, यह विपदा निरवारौ,
सिंची खून की बाग न उजरै, यहिका दौरि बचावौ,
अबहूं समय देश कै धरती, आवहु लेहु उबारि।
भारत मइया हो पुकारै तुम्हैं अँचरा पसारि।
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सुन्दर भाव! प्यारा गीत! इसे ’कविजी’ की आवाज में पोस्ट किया जाता तो और जमता!
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