लोक गीत -उतारैं आरती
(आकाशवाणी,लखनऊ द्वारा प्रसारित देशगीत)
आवउ देश के शहिदवौ उतारै आरती।
कबको मुरझो देखि न पायेउ अपनो देश बगीचो,
तन कै रकत विहँसि हँसि अंजुरिन भरिके जेहि का सींचो,
आजु पूजा कै सजाये साजु ठाढ़ी भारती।
आवउ देश के शहिदवौ उतारैं आरती।
वनिता, सुत को मोह न कीन्हेउ झूलेउ मौत हिंडोले,
बरछी,ढाल,कृपाण सहेउ सब सहेउ बम्ब के गोले,
माता तुमका निहारै आंसू धार ढारती।
आवउ देश के शहिदवौ उतारैं आरती।
धरती के कन -कन मां रमिगइ तुम्हरी अमर कहानी,
मरिकइ मइया केर बचायेउ तुम आंखिन कै पानी,
वहइ अंचरा पसारे मइया प्रान वारती
आवउ देश कै शहिदवौ उतारैं आरती।
(आकाशवाणी,लखनऊ द्वारा प्रसारित देशगीत)
आवउ देश के शहिदवौ उतारै आरती।
कबको मुरझो देखि न पायेउ अपनो देश बगीचो,
तन कै रकत विहँसि हँसि अंजुरिन भरिके जेहि का सींचो,
आजु पूजा कै सजाये साजु ठाढ़ी भारती।
आवउ देश के शहिदवौ उतारैं आरती।
वनिता, सुत को मोह न कीन्हेउ झूलेउ मौत हिंडोले,
बरछी,ढाल,कृपाण सहेउ सब सहेउ बम्ब के गोले,
माता तुमका निहारै आंसू धार ढारती।
आवउ देश के शहिदवौ उतारैं आरती।
धरती के कन -कन मां रमिगइ तुम्हरी अमर कहानी,
मरिकइ मइया केर बचायेउ तुम आंखिन कै पानी,
वहइ अंचरा पसारे मइया प्रान वारती
आवउ देश कै शहिदवौ उतारैं आरती।
वाह! आकाशवाणी वाला टेप मांगकर उसको पोस्ट किया जाये तो बहुत अच्छा रहेगा।
ReplyDeleteवाह... वाकई लाजवाब रचना है...काश कि सुनने को मिल जाती
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